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रायगढ़, 9 मई 2026 : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने आज जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली से वर्चुअल माध्यम के जरिए नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारियों को अधिक से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामा के आधार पर निराकरण करने के लिए प्रेरित करते हुए लोक अदालत की सफलता हेतु शुभकामनाएं दीं।
नेशनल लोक अदालत के दौरान जिला रायगढ़ एवं जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में लंबित और प्री-लिटीगेशन सहित 7 लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभिन्न न्यायालयों में आपसी सहमति, संवाद और समझौते के माध्यम से मामलों का त्वरित समाधान कर पक्षकारों को राहत प्रदान की गई।
जिला एवं अपर सत्र न्यायालय सारंगढ़-बिलाईगढ़, सिविल जिला रायगढ़ में पदस्थ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष डहरिया की खण्डपीठ क्रमांक-20 में लंबित प्रकरण छत्तीसगढ़ राज्य विरुद्ध मनोज सारथी में एक मानवीय पहल देखने को मिली। प्रार्थी देवप्रसाद के पुत्र ने न्यायालय को बताया कि उनके पिता चलने-फिरने में असमर्थ हैं और घर में मोबाइल सुविधा नहीं होने के कारण वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी उपस्थित नहीं हो सकते।
स्थिति को देखते हुए पैरालीगल वॉलेंटियर नारद प्रसाद श्रीवास को प्रार्थी के निवास भेजा गया, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजीनामे के संबंध में सहमति प्राप्त की गई। “न्याय आपके द्वार” की भावना के अनुरूप प्रकरण का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।
कुटुम्ब न्यायालय रायगढ़ में पदस्थ न्यायाधीश विनोद देवांगन ने भी पारिवारिक विवादों में समझाइश और संवाद के माध्यम से तीन परिवारों को पुनः एकजुट करने में सफलता हासिल की। लोक अदालत में पारिवारिक मामलों के सौहार्दपूर्ण समाधान को विशेष प्राथमिकता दी गई।
नेशनल लोक अदालत के दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में विभिन्न बैंक, फाइनेंस कंपनियां, विद्युत विभाग, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि, अधिवक्तागण और बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे। सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।