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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में समुद्री बीमा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल के गठन को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी प्रदान की जाएगी, ताकि वैश्विक स्तर पर संवेदनशील समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों के लिए सस्ती और निरंतर बीमा सुविधा सुनिश्चित की जा सके।
नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह पूल हुल एंड मशीनरी, कार्गो, प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी तथा वॉर रिस्क सहित सभी प्रकार के समुद्री जोखिमों को कवर करेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से भारत में ही समुद्री बीमा दायित्वों का प्रबंधन संभव होगा और अंडरराइटिंग, क्लेम प्रबंधन तथा समुद्री कानूनी विशेषज्ञता का विकास भी होगा। इस पूल के संचालन और निगरानी के लिए एक शासी निकाय का गठन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संप्रभु गारंटी का उद्देश्य आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, बाहरी जोखिमों के प्रति लचीलापन सुनिश्चित करना और रणनीतिक नियंत्रण को मजबूत करना है।
मंत्रिमंडल ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को भी मंजूरी दी है, जो 1 जनवरी से प्रभावी होगी। इसके साथ डीए/डीआर की दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगी। इस निर्णय से केंद्र सरकार पर सालाना ₹6,791 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा और 50 लाख से अधिक कर्मचारियों तथा 68 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-III) को मार्च 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने वाली सड़कों का उन्नयन करना है। इस योजना के लिए संशोधित बजट ₹83,977 करोड़ निर्धारित किया गया है। साथ ही, परियोजनाओं की समय-सीमा में भी विस्तार किया गया है—मैदानी क्षेत्रों में सड़क और पुल तथा पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें मार्च 2028 तक, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में पुल मार्च 2029 तक पूरे किए जाएंगे।
कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने ₹24,815 करोड़ की लागत वाली दो प्रमुख रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें गाजियाबाद–सीतापुर और राजमहेंद्रवरम (निदादवोलु)–विशाखापट्टनम (दुव्वाडा) रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का कार्य शामिल है। ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 15 जिलों को कवर करेंगी और रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने, भीड़ कम करने तथा सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार लाने में मदद करेंगी।