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छत्तीसगढ़ आयोग ने बीमा विवाद में मुआवजा घटाकर सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर तय किया।

April 23, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक बीमा विवाद में अहम फैसला देते हुए बीमा कंपनी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली है और मुआवजे की राशि को घटाकर सर्वेयर की रिपोर्ट के अनुसार तय कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा दावे के निपटारे में अधिकृत सर्वेयर की रिपोर्ट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जब तक उसमें कोई ठोस त्रुटि साबित न हो।

यह मामला Magma HDI General Insurance Company Ltd. बनाम दशरथ पुरी गोस्वामी से जुड़ा है, जिसमें आदेश 23 अप्रैल 2026 को पारित किया गया। उपभोक्ता ने अपने महिंद्रा बोलेरो मैक्सी ट्रक का बीमा कराया था। जनवरी 2024 में वाहन रास्ते में खराब हो गया और अज्ञात लोगों द्वारा उसमें तोड़फोड़ कर दी गई, जिससे वाहन को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद वाहन मालिक ने मरम्मत कराई और लगभग 2.90 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया।

बीमा कंपनी को घटना की सूचना दी गई और बाद में सर्वेयर नियुक्त किया गया, जिसने नुकसान का आकलन करीब 84,787 रुपये किया। हालांकि, जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला देते हुए बीमा कंपनी को 2,90,250 रुपये, ब्याज और अन्य क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की। कंपनी का तर्क था कि उपभोक्ता ने आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए और सर्वेयर की रिपोर्ट के अनुसार ही भुगतान किया जाना चाहिए। वहीं, उपभोक्ता का कहना था कि कंपनी ने जानबूझकर दावा लंबित रखा और बाद में उसे अस्वीकार कर दिया।

राज्य आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि सर्वेयर की रिपोर्ट में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है और बीमा दावों के निपटारे में ऐसी रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग ने कहा कि जिला आयोग द्वारा मरम्मत अनुमान के आधार पर पूरी राशि देना उचित नहीं था।

इसी आधार पर आयोग ने जिला आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए बीमा कंपनी को केवल 84,787 रुपये (सर्वेयर द्वारा आकलित राशि) 6% वार्षिक ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया। यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो यह ब्याज 9% वार्षिक हो जाएगा। अन्य राहतों को यथावत रखा गया।

यह फैसला बीमा मामलों में सर्वेयर रिपोर्ट की अहमियत को फिर से रेखांकित करता है और स्पष्ट करता है कि केवल मरम्मत के अनुमान के आधार पर उच्च मुआवजा देना उचित नहीं माना जाएगा, जब तक कि सर्वेयर रिपोर्ट में खामी सिद्ध न हो।

Case Reference : B.M., Magma HDI Gen. Insur. Co. Ltd. Vs. Dashrath Puri Goswami