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April 7, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पंडरी (रायपुर) ने एक महत्वपूर्ण बीमा विवाद मामले में आंशिक राहत देते हुए निचली आयोग के आदेश को पलट दिया है। यह मामला मोक्षित साहू बनाम एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। आयोग ने 7 अप्रैल 2026 को अपना निर्णय सुनाया।
मामले के अनुसार, मोक्षित साहू की मां ने 22 नवंबर 2019 को एसबीआई लाइफ की “स्मार्ट चैंप इंश्योरेंस” पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी के तहत हर साल प्रीमियम जमा कर 10 लाख रुपये का बीमा कवर और 18 वर्षों के बाद 20 लाख रुपये की परिपक्वता राशि का प्रावधान था। पॉलिसी में यह भी शर्त थी कि बीमाधारक की मृत्यु होने पर बाकी प्रीमियम कंपनी द्वारा भरा जाएगा। हालांकि, 20 मई 2021 को बीमाधारक की अचानक मृत्यु हो गई।
दावा प्रस्तुत किए जाने के बाद बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बीमाधारक ने पॉलिसी लेते समय अपनी पूर्व बीमारी (सिकल सेल एनीमिया) की जानकारी छिपाई थी। कंपनी का तर्क था कि यह “अत्यंत सद्भावना” (utmost good faith) के सिद्धांत का उल्लंघन है।
वहीं, अपीलकर्ता पक्ष का कहना था कि बीमाधारक को उक्त बीमारी नहीं थी और न ही वह कभी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। उन्होंने यह भी दलील दी कि कंपनी ने पॉलिसी जारी करने से पहले कोई मेडिकल जांच नहीं कराई और न ही बीमारी से मृत्यु का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत किया।
राज्य आयोग ने दोनों पक्षों के दस्तावेज और तर्कों की समीक्षा के बाद पाया कि रिकॉर्ड में ऐसे मेडिकल साक्ष्य मौजूद हैं जो यह संकेत देते हैं कि बीमाधारक पहले से बीमारी से ग्रसित थीं और इस तथ्य को प्रस्ताव फॉर्म में नहीं बताया गया। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करना पूरी तरह गलत नहीं माना गया।
हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी के पास बीमाधारक द्वारा जमा की गई प्रीमियम राशि को पूरी तरह जब्त करने का अधिकार होते हुए भी, मानवता के आधार पर उस राशि को नामित व्यक्ति को लौटाया जाना चाहिए। इसी आधार पर आयोग ने आदेश दिया कि बीमाधारक द्वारा जमा की गई पूरी प्रीमियम राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित नाबालिग मोक्षित साहू के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा की जाए, जिसे वह बालिग होने पर निकाल सकेंगे।
इसके अलावा, आयोग ने बीमा कंपनी को 20,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 10,000 रुपये वाद व्यय के रूप में देने का भी निर्देश दिया।
इस तरह, राज्य आयोग ने मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए एक ओर बीमा कंपनी के निर्णय को आंशिक रूप से सही माना, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता के हितों की रक्षा करते हुए आर्थिक राहत सुनिश्चित की।
Case Reference : Mokshit Sahu Vs. B.M., S.B.I. Life Insurance Co. Ltd.