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April 16, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी के पक्ष में निर्णय देते हुए जिला आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया और शिकायतकर्ता की बीमा दावा याचिका खारिज कर दी। यह मामला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम धर्मेंद्र साहू से जुड़ा है, जिसमें आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा पॉलिसी की शर्तों के बाहर जाकर किसी लाभ का दावा नहीं किया जा सकता।
यह विवाद एक हार्वेस्टर मशीन में आग लगने से हुए नुकसान से संबंधित था। धर्मेंद्र साहू ने अपनी हार्वेस्टर मशीन का बीमा कराया था, जिसकी वैधता 10 अप्रैल 2024 से 9 अप्रैल 2025 तक थी और बीमित घोषित मूल्य 5.5 लाख रुपये था। अक्टूबर 2024 की रात मशीन में आग लग गई, जिसके बाद ग्रामीणों की मदद से आग बुझाई गई और पुलिस को सूचना दी गई। मशीन की मरम्मत पर लगभग 1.04 लाख रुपये खर्च हुए, जिसके लिए बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने भुगतान से इनकार कर दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग, राजनांदगांव ने पहले इस मामले में आंशिक रूप से शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए मरम्मत खर्च 90,986 रुपये, मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय 5,000 रुपये देने का आदेश दिया था। साथ ही, निर्धारित समय में भुगतान न होने पर ब्याज का भी निर्देश दिया गया था।
हालांकि, राज्य आयोग ने अपील सुनते हुए पाया कि बीमा पॉलिसी में IMT-23 एंडोर्समेंट शामिल नहीं था, जिसके तहत टायर, ट्यूब, बंपर, हेडलाइट्स और पेंटवर्क जैसे हिस्सों का नुकसान कवर होता है। आयोग ने यह भी नोट किया कि पॉलिसी में 5,250 रुपये का अनिवार्य डिडक्टिबल (कटौती) था, जबकि सर्वेयर ने नुकसान का आकलन मात्र 3,368.20 रुपये किया था। चूंकि यह राशि डिडक्टिबल से कम थी, इसलिए बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना उचित माना गया।
आयोग ने कहा कि बीमा अनुबंध की शर्तों का सख्ती से पालन आवश्यक है और ऐसी स्थिति में बीमाकर्ता पर भुगतान का दायित्व नहीं बनता। इस आधार पर राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को “कानूनी रूप से अस्थिर” बताते हुए निरस्त कर दिया और शिकायत पूरी तरह खारिज कर दी।
Case Reference : National Insurance Co. Ltd. Vs. Dharmendra Sahu