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स्वास्थ्य जानकारी छिपाने पर बीमा दावा खारिज, राज्य आयोग ने कंपनी के पक्ष में दिया बड़ा फैसला।

April 16, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी के पक्ष में निर्णय देते हुए निचली आयोग का आदेश रद्द कर दिया। यह मामला प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड और स्म्ट. मैना बंजारे के बीच बीमा दावे को लेकर विवाद से जुड़ा था।

आयोग ने 16 अप्रैल 2026 को अपने आदेश में दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि बीमा पॉलिसी लेते समय बीमित व्यक्ति द्वारा अपने स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी, जो बीमा अनुबंध की मूल शर्तों का उल्लंघन है।

मामले के अनुसार, मैना बंजारे के पति ने गृह ऋण लेते समय बीमा पॉलिसी ली थी, जो 2016 से 2031 तक प्रभावी थी। 2018 में उनकी मृत्यु के बाद बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमित व्यक्ति पहले से ही गंभीर बीमारियों जैसे किडनी रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे, जिनकी जानकारी पॉलिसी लेते समय नहीं दी गई थी।

जिला उपभोक्ता आयोग ने पहले बीमा कंपनी को बीमा राशि और मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य आयोग ने इस आदेश को गलत ठहराया। आयोग ने पाया कि बीमित व्यक्ति ने प्रस्ताव पत्र में अपने स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के जवाब गलत दिए थे और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया था।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Satwant Kaur Sandhu बनाम New India Assurance Company Ltd. का हवाला देते हुए कहा कि बीमा अनुबंध “अत्यधिक सद्भावना” (utmost good faith) पर आधारित होता है। ऐसे में बीमित व्यक्ति का यह कर्तव्य होता है कि वह सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का सही और पूर्ण खुलासा करे।

इसके साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि यदि बीमा पॉलिसी लेते समय महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई जाती है, तो बीमा कंपनी को दावा खारिज करने का अधिकार होता है और इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की दोनों अपीलें स्वीकार कर लीं और जिला आयोग का आदेश निरस्त कर दिया।

Case Reference : Pramerica Life Insurance Ltd. & Anr. Vs. Smt. Maina Banjare