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April 8, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने मोबाइल नंबर पोर्टिंग से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता की अपील खारिज कर दी है। आयोग ने अपने 8 अप्रैल 2026 के आदेश में जिला आयोग के पहले के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सेवा में किसी प्रकार की कमी साबित नहीं हुई है।
मामला दाऊलाल यादव बनाम जियो डिजिटल लाइफ से संबंधित है। अपीलकर्ता दाऊलाल यादव ने दावा किया था कि उन्होंने नवंबर 2017 में अपना मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए जियो के स्टोर पर आवेदन किया था। उनके अनुसार, कंपनी के कर्मचारी ने आधार कार्ड लेकर सिम जारी किया और कुछ दिनों में नंबर पोर्ट होने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में नंबर पोर्ट नहीं हुआ और उन्हें टालमटोल किया गया। अंततः उन्हें बताया गया कि नंबर किसी अन्य कंपनी में चला गया है, जिससे उन्हें नुकसान हुआ।
जवाब में जियो डिजिटल लाइफ की ओर से कहा गया कि नंबर पोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया नियामक व्यवस्था के तहत होती है और इसमें यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) का सही होना आवश्यक है। कंपनी के अनुसार, अपीलकर्ता द्वारा दिया गया UPC गलत था, जिसके कारण पोर्टिंग अनुरोध अस्वीकार हो गया। कंपनी ने यह भी कहा कि उपभोक्ता को नया UPC जनरेट कर दोबारा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी, जो उन्होंने नहीं किया।
राज्य आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद पाया कि पोर्टिंग प्रक्रिया में आवश्यक कदम पूरे किए गए थे। आयोग ने माना कि गलत UPC के कारण ही पोर्टिंग नहीं हो सकी और इसमें सेवा प्रदाता की कोई लापरवाही नहीं थी। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि अपीलकर्ता ने सभी आवश्यक पक्षकारों को मामले में शामिल नहीं किया और तथ्यों को पर्याप्त स्पष्टता से प्रस्तुत नहीं किया।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में सेवा में कमी का आरोप साबित नहीं होता। इसलिए अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा गया। साथ ही, दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए गए।
Case Reference : Daulal Yadav Vs. Jio Digital Life