1
1
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
April 23, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक अहम फैसले में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन से जुड़े विवाद को दोबारा सुनवाई के लिए जिला आयोग को वापस भेज दिया है। यह मामला विकास चंद्र बनाम वेंकटेश हीरो से जुड़ा है, जिसमें उपभोक्ता ने वाहन की बैटरी में खराबी और सेवा में कमी का आरोप लगाया था।
मामले के अनुसार, बिलासपुर निवासी विकास चंद्र ने 22 अक्टूबर 2021 को ₹74,240 में एक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदा था। उनका कहना था कि वाहन की बैटरी पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए तीन साल की वारंटी थी। सितंबर 2023 में उन्होंने वाहन सर्विस के लिए दिया और बैटरी से संबंधित शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कंपनी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की।
जिला आयोग ने 6 अगस्त 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी। आयोग का कहना था कि उपभोक्ता ने बैटरी की वारंटी साबित करने के लिए केवल एक पंपलेट पेश किया, जबकि वास्तविक वारंटी कार्ड रिकॉर्ड में नहीं था। इसके अलावा, सर्विसिंग का जॉब कार्ड भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित नहीं हो सका कि बैटरी में खराबी की सूचना दी गई थी। इन साक्ष्यों के अभाव में आयोग ने सेवा में कमी को सिद्ध नहीं माना।
हालांकि, अपील के दौरान उपभोक्ता ने अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें वाहन का यूजर मैनुअल भी शामिल था। इस मैनुअल में वारंटी नीति, शर्तें, सर्विस शेड्यूल और वाहन के महत्वपूर्ण विवरण दर्ज थे, जिन पर विक्रेता की मुहर और हस्ताक्षर भी मौजूद थे। आयोग ने इन दस्तावेजों को मामले के निष्पक्ष निपटारे के लिए महत्वपूर्ण माना।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि Hero Electric की वारंटी नीति के अनुसार, लिथियम-आयन बैटरी पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए तीन साल की वारंटी दी जाती है, जबकि व्यावसायिक उपयोग के मामलों में यह अवधि अधिकतम दो साल तक सीमित रहती है।
इन तथ्यों को देखते हुए राज्य आयोग ने बिना मामले के गुण-दोष में जाए, इसे दोबारा सुनवाई के लिए जिला आयोग को वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया गया कि नए दस्तावेजों के आधार पर दोनों पक्षों को सुनकर मामले का पुनः निर्णय किया जाए। पक्षकारों को 25 मई 2026 को जिला आयोग में उपस्थित होने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह फैसला उपभोक्ता मामलों में दस्तावेजों की अहमियत और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को रेखांकित करता है।
Case Reference : Vikas Chandra Vs. Venkatesh Hero