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April 16, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा है। यह मामला वाहन बीमा दावे से जुड़ा था, जिसमें टायर फटने से हुए हादसे को लेकर विवाद सामने आया था।
मामले के अनुसार, राजनांदगांव निवासी अमरजीत सिंह गिल का वाहन नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ बीमित था। अप्रैल 2023 में जब वाहन नागपुर से राजनांदगांव की ओर जा रहा था, तब सामने वाले टायर के फटने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दी गई और दावा भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नुकसान किसी बाहरी कारण से नहीं हुआ।
इसके बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने मरम्मत के बिल पेश किए, जिनकी कुल राशि 1,27,341 रुपये थी। जिला आयोग ने आंशिक रूप से शिकायत स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को यह राशि चुकाने के साथ 10,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 3,000 रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया। साथ ही भुगतान में देरी होने पर ब्याज भी निर्धारित किया गया।
बीमा कंपनी ने इस आदेश को राज्य आयोग में चुनौती दी और तर्क दिया कि टायर फटना वाहन के रखरखाव से जुड़ा मामला है, जो बीमा शर्तों के तहत कवर नहीं होता। कंपनी ने सर्वेयर रिपोर्ट का हवाला भी दिया, जिसमें दावा अस्वीकार करने की सिफारिश की गई थी।
हालांकि आयोग ने पाया कि बीमा पॉलिसी में IMT-23 एंडोर्समेंट शामिल था, जिसके तहत टायर फटने से हुए नुकसान को भी दुर्घटना माना जाता है और उसका मुआवजा दिया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी नोट किया कि बीमा कंपनी जिला आयोग के सामने कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सकी थी, और अपील के दौरान नए दस्तावेज पेश करने का प्रयास भी खारिज कर दिया गया।
राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि जब पॉलिसी में अतिरिक्त प्रीमियम लेकर ऐसी शर्त जोड़ी गई हो, तो बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करना अनुचित है। साथ ही, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत मरम्मत बिलों को विश्वसनीय मानते हुए आयोग ने जिला आयोग के आदेश को सही ठहराया।
अंततः आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि मामले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
Case Reference : National Insurance Co. Ltd. Vs. Amarjeet Singh Gill